Friday, January 13, 2012

माँ तुझे सलाम

माँ किस्मत वालो को मिलती है । वो सभी लोग किस्मत वाले हैं जिनके पास माँ है । और जो लोग माँ खो चुके हैं शायद वही इस गम को जान सकते हैं । वो लोग आज दुखी हैं । लेकिन जब तक उन्हें माँ का साथ मिला बहुत खुश थे । दुनिया के हर गम से अन्जान । आज उन्हें यह अहसास है की कोई अपना उन्हें छोड़ कर बहुत दूर जा चुका है जहाँ से लौटना मुश्किल है ।
आज 13 जनवरी एक माह गुजर गया माँ को गुज़रे हुए, आज से ठीक एक महीने पहले 13 दिसंबर 2011 के दिन मेरी प्यारी माँ का निधन हुआ था. डॉक्टर्स के गलत इलाज की वजह से मै आज अपनी माँ खो चुका हु ।
जब तक माँ का साथ था मुझे माँ ने किसी गम का एहसास होने नहीं दिया । साधारण शब्दों मे कहू तो गम और ख़ुशी मे माँ हमेशा से भागीदार रही ।
"माँ" और "माँ की ममता" ये दोनों जिसे भी मिला वो दुनिया के हर दुःख से अन्जान रहा । क्यूँ की बच्चा जब भी रोता है तो माँ भी रो देती है, और बच्चे के हँसने पास माँ उसे अपनी ख़ुशी समझ साथ साथ हंसने लग जाती है । माँ का प्यार , दुलार और गलती करने पर फटकार माँ के खोने पर ही हमे याद आयेंगे । क्यों की माँ बच्चे से एक ही बार विदाई लेगी जो की अंतिम होगा और जहा से कोई लौट कर नहीं आता ।
आज मै बहुत दुखी हूँ और अपने आप को नियंत्रित करने की भरसक कोशिश कर रहा हू । लेकिन संभल नहीं पा रहा । क्यूंकि एक माह पहले आज ही के दिन उस अंतिम पल मे मैं माँ के साथ था । उनकी पीड़ा और विदाई आज भी मेरी नजरो मे असहनीय है । और किसी की भी पीड़ा तब अधिक असहनीय हो जाती है जब वो आपको अधिक प्यारा हो । सब कुछ इतना अचानक हो गया जिसका मुझे पता भी नहीं चला । आज भी उनकी यादे मेरे ज़हन मे हैं जिन्हें मे कभी नहीं भुलाना चाहता । यह लिखते हुए मेरी आँखे नम हो रही हैं क्यूँकी एक लड़का जो कभी खुश बहुत खुश हुआ करता था हर राज़ और घटनाये माँ को बताया करता था । और जब भी हँसता तो हंसी रोके न  रूकती  थी, और समाज मे भी अपने इस लाडले के गुणगान करते न थकती थी । वो आज एकदम अकेला पड़ गया है ।
हमें किसी भी चीज़ का गम अक्सर उसके खो जाने के बाद होता है । इस संसार मे भगवान के इस रूप को उनके जाने के बाद ही पहचान पाया हू
और यह भी सच है कि अपनों से दूरी और बहुत लंबी दूरी जिंदगी भर का दर्द दे जाती है। हम उन्हें खुशी पता नहीं कितने दे पाते हैं लेकिन उनके दूर चले जाने पर रोते बहुत हैं। यह हमारी कमजोरी है कि हम भावनाओं में आसानी से बह जाते हैं। यह लगाव अदृश्य होता है, लेकिन मजबूती से जुड़ा हुआ। इसकी डोर कभी कमजोर नहीं पड़ती और शायद समय-दर-समय और मजबूत होती जाती है। यही जीवन का सच है। रिश्तों की डोरी हमें जोड़े रखती है, नहीं तो हम कब के बिखर गये होते।
 अंत मे माँ के लिए इतना ही लिखना चाहूँगा
"मैं कभी बतलाता नहीं
पर अँधेरे से डरता हू मे माँ"
[तेरे बिन जी न पाऊ मै माँ]

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